जब भी देखता हूँ मैं तुमको ना जाने क्यूँ अपना सा लगता है
दिल की धड़कन रुक सी जाती है साँसों का थमना सा लगता है
खुली आँखों से देखकर भी ये सारा इक सपना सा लगता है
भरी महफ़िल में होकर भी ये पागल दिल तन्हा सा रहता है
जब भी देखता हूँ तुमको .................................
इतनी शिद्दत से मिली हो तुम मुझको
कि दुआ में उठे ये हाँथ भला क्या मांगे
जिन आँखों ने किया हो दीदार तेरी आँखों का
वो अपने लिए प्यारे से भला ख्वाब क्या मांगे
इन होंठों ने जो कर लिया सजदा तेरे हांथों का
वो खुदा से अपने लिए भला फरियाद क्या मांगे
जहाँ भी जाता हूँ हर मंजर में मैं पता हूँ बस तुझको
कि अब दूर होकर भी तेरे पास होने का एहसास है मुझको
सुनता हूँ तेरी साँसों को, तेरी धड़कन को बस हर पल
कि हर संगीत में तेरी झलक का अब गुमान है मुझको
इक ख्वाहिश है मेरी, लिखूं तेरी शान में मैं दो शब्द
अब तेरे प्यार में शायर बनना इकरार है मुझको
मेरी जिंदगी भी तु है, मेरा गुजारा भी अब तु है
तु ही मेरा साहिल है, किनारा भी अब तु है
तेरी आँखें ही मेरी दुनिया, मेरा आशियाना भी तु है
मेरी तक़दीर भी तु है, तक़दीर का हर सितारा भी अब तु है
तेरा साथ ही मेरे लिए अब इबादत है बस
कि मेरी जन्नत भी तुझसे है, जन्नत का हर नजारा भी अब तु है