Wednesday, April 7, 2010

जब भी देखता हूँ मैं तुमको ना जाने क्यूँ अपना सा लगता है
दिल की धड़कन रुक सी जाती है साँसों का थमना सा लगता है
खुली आँखों से देखकर भी ये सारा इक सपना सा लगता है
भरी महफ़िल में होकर भी ये पागल दिल तन्हा सा रहता है
जब भी देखता हूँ तुमको .................................


इतनी शिद्दत से मिली हो तुम मुझको
कि दुआ में उठे ये हाँथ भला क्या मांगे
जिन आँखों ने किया हो दीदार तेरी आँखों का
वो अपने लिए प्यारे से भला ख्वाब क्या मांगे
इन होंठों ने जो कर लिया सजदा तेरे हांथों का
वो खुदा से अपने लिए भला फरियाद क्या मांगे


जहाँ भी जाता हूँ हर मंजर में मैं पता हूँ बस तुझको
कि अब दूर होकर भी तेरे पास होने का एहसास है मुझको
सुनता हूँ तेरी साँसों को, तेरी धड़कन को बस हर पल
कि हर संगीत में तेरी झलक का अब गुमान है मुझको
इक ख्वाहिश है मेरी, लिखूं तेरी शान में मैं दो शब्द
अब तेरे प्यार में शायर बनना इकरार है मुझको


मेरी जिंदगी भी तु है, मेरा गुजारा भी अब तु है
तु ही मेरा साहिल है, किनारा भी अब तु है
तेरी आँखें ही मेरी दुनिया, मेरा आशियाना भी तु है
मेरी तक़दीर भी तु है, तक़दीर का हर सितारा भी अब तु है
तेरा साथ ही मेरे लिए अब इबादत है बस
कि मेरी जन्नत भी तुझसे है, जन्नत का हर नजारा भी अब तु है

Saturday, January 24, 2009

ऐ जिंदगी ना ढूंढना मुझे अब के बार

I am starting my first blog here with one of my poem(most favorite)

ऐ जिंदगी ना ढूंढना मुझे अब के बार
ग़र ये बेरहम खेल दोबारा होगा

ना कोई मेरी आंखों का तारा होगा
ना किसी की जुबां पे नाम हमारा होगा

दिल में धड़कन ही ना रहेगी
ना इसमे किसी का बसना हमे गँवारा होगा

डूब जायेगी कश्ती हमारी मजधार में
किनारे का हमे ना कोई सहारा होगा

ऐ जिंदगी ना ढूँढना मुझे अब के बार
ग़र ये बेरहम खेल दोबारा होगा

छोड़ जाऊंगा एक निशाँ इस जमाने में अपनी
खिजां में उजड़ा हुआ बहार ही बस हमारा होगा

सो जाऊंगा इन वादियों में मैं कहीं
की तेरी यादों के सहारे ना मेरा गुजारा होगा

ग़र थाम ना पायी ये हाथे तेरे हाथों को
इन बेजान हाथों का फिर जलना ही इरादा होगा

खो जायेगी मेरी हस्ती रात के साये में ही
सुबह का उगता हुआ सुरज तेरे लिए ही दोबारा होगा

ऐ जिंदगी ना ढूँढना मुझे अब के बार
ग़र ये बेरहम खेल दोबारा होगा

ग़र आए मेरी याद आंखों में आँसू बन के
समझ लेना मैंने तुम्हे दिल से दिल से पुकारा होगा

ना बैठना मेरी आस में इन किनारों पर कभी
उस किनारे इंतजार मुझे तुम्हारा होगा

ग़र मांगनी हो ख्वाहिशें उस खुदा से
हसरतों को हकीकत करने का ज़ज्बा हो दिल से

देखना आसमां में बिखरे उन सितारों की ओर
वो टूटता हुआ तारा ही हमारी शख्सियत हमारा नज़ाराहोगा
ऐ जिंदगी ना ढूँढना मुझे अब के बारगर ये बेरहम खेल दोबारा होगा